
ज्योतिष शास्त्र का भारत की संस्कृति में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है पुरातन समय से लोग ग्रहण को नक्षत्र ग्रहण दोष को समझ के अपनी लाइफ के फैसले लेते थे. Or who is the father of astrology? भारत में फादर ऑफ़ एस्ट्रोलॉजी का स्थान भृगु को प्राप्त है उनको बहुत ही महान संत ऋषि ज्ञानी और ज्योतिष के सबसे बड़े विद्वान का अव्वल दर्जा प्राप्त है
Who was Sage Bhrigu?
हिंदू धार्मिक ग्रंथ के अनुसार भृगु ऋषि सप्त ऋषि में से एक थे और सप्त ऋषि वह महान इंसान थे जिन्होंने भारत के धार्मिक और संस्कृति को मजबूत करने में बड़ा योगदान दिया भृगु ऋषि के पास बहुत ही गहरा ज्योतिष के ज्ञान का भंडार था और उन्होंने अपनी तपस्या के द्वारा ग्रहण की दिशा ग्रहों के चलने का धन जी को इंसान के जीवन के साथ बहुत ही सफलता के साथ समझा था
उनका कहना था कि व्यक्ति के जीवन के ऊपर ग्रहण का सीधा असर होता है
और इंसान के जन्म के टाइम से ही ग्रहण का असर शुरू होता है
और उनके चलने के द्वारा है इंसान की सोच व्यक्तिगत कर्तव्य करियर और विवाह और आने वाले टाइम में क्या कठिनाइयां आ सकती है सबका पता चल जाता है
Importance of the Bhrigu Samhita
बीरबल ऋषि की सबसे बड़ी महत्व और उनकी सबसे बड़ी दिन जो बिल्कुल समाज को है वह है
भृगु समित यह प्राचीन वैदिक ज्योतिष ग्रंथ है जो आज पूरी दुनिया में एस्ट्रोलॉजर मतलब ज्योतिषी के लिए बहुत ही जरूरी महत्वपूर्ण माना जाता है
इस ग्रंथ के साथ लाखों लोगों की कठिनाइयों को समझा जाता है जैसे की horoscope reading, horoscope prediction, spiritual reading,
love problem, marriage problem, relationship issues, family issues, career issues, job and business problem, visa problems, court case issues
और अनेक और कठिनाइयों को बहुत ही सरलता के साथ समझा और ठीक किया जाता है
Final thought
सेग भृगु को ज्योतिष का पिता भारत में इसलिए कहा जाता है
क्योंकि उन्होंने ज्योतिष को पूरी दुनिया के सामने
एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय और विद्या के रूप में पेश किया है
भृगु समिता जैसे महान और ग्रहण और इंसानी जीवन के संबंध को बहुत ही सरलता के समझाया है
और उनके ज्ञान के भंडार और ज्योतिष की शक्तियों में बहुत ही बड़ा योगदान दिया है
जो कि आज लोगों के लिए बहुत ही प्रेरणा का स्रोत बन चुका है!
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